नाइटी- एक सच्ची घटना पर आधारित कहानी

नाइटी-१-बिग बॉस की चालाकी
नाइटी-२ -और पालिटिक्स शुरू
नाइटी-३ -मजेदार प्रतियोगिता
नाइटी-४ -उफ ! इतनी प्रतियोगिता
नाइटी-५ -ये किसकी नाइटी ?
नाइटी-६-चुप चुप ! कोई सुन रहा है
नाइटी-७-और पड़ोसी आग लगा गए
नाइटी-८-जबरदस्त छींटाकशी
नाइटी-९-अहं का टकराव
नाइटी-१० पड़ोसी की परेशानी
नाइटी-११- तीसरे की खीर जली
नाइटी-१२- अलग अलग हैरान परेशान
नाइटी-१३-शुरू हुई एक अन्य कहानी
नाइटी-१४- मुझे सबसे सुन्दर दिखना है
नाइटी-१५- उधारी का हार
नाइटी-१६- हार गायब !!
नाइटी-१७- और वे हार खोजते रहे
नाइटी-१८- अब उधारी कैसे चुकता हो ?
नाइटी-१९-ओह ! वो हार तो ….
नाइटी-२०- एक मजेदार ग्रुप डिस्कशन !
नाइटी-२१-खुद की खुद से लड़ाई !
नाइटी-२२- बड़बोली सुनन्दा
नाइटी-२३- सुनन्दा का परिवार
नाइटी-२४- हाय सुनन्दा जी !!
नाइटी-२५- असली इक दूजे के लिए
नाइटी-२६- आखिरकार राज खुला ?
नाइटी-२७- एक बार फिर -वही कहानी !

नाइटी-१-बिग बॉस की चालाकी

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आज की शाम पूरी तरह से जश्न का माहौल था , क्योंकि ये शाम कम्पनी के अधिकारियों के नाम थी । और हो भी क्यों नही ! आखिर कम्पनी ने पिछले एक साल मे दिये गये लक्ष्य से दुगना उत्पादन जो कर लिया था । परिणाम स्वरूप कम्पनी के सीईओ को पदोन्नति मिली थी अब वे और भी बड़ा साहब बन कर कम्पनी के हेडआफिस स्थान्तरण पर जा रहे थे , ये उनका बरसों का दे खा सपना था जो अब पूरा हो रहा था । हाँ तो बड़े साहब ने आज शाम की इस पार्टी को बेहद शानदार बनाने मे कोई कसर नही छोड़ी थी । वो इसको एक यादगार शाम बना कर खुशी खुशी यहाँ से जाना चाहते थे ।
    क्लब के लाॅन को बड़ी खूबसूरती से सजाया गया था । किनारे लगे पेड़ पौधौं पर झिलमिलाती बिजली की बत्तियाँ , लॅान के बाजू मे बने स्विमिंग पूल के किनारे रखी स्पेशल कुर्सियाँ और वहाँ एक दुकान की तरह बोतलों से सजा बार , लाॅन के किनारे सुन्दर मेजपोशों से सजे टेबल , भीनी भीनी सुगन्ध , आकर्षक पोशाकों से सजे  हाथों मे ट्रे लिये इधर उधर जाते हुए झुक झुक कर अथितियों को आदर पूर्वक पेय व अन्य खाद्य पदार्थ को पेश करते हुए सेवक गण , यहाँ उपस्थित सभी अथितियों को बराबर ये अहसास  करा रहे थे कि वे कुछ स्पेशल ही हैं , तभी यहाँ हैं ।
   एक ओर एक सुन्दर सा स्टेज सजा था वहाँ विराजमान थे सीईओ साहब की पसन्द के सुप्रसिद्ध गजल गायक जो अपने साजिन्दों के साथ बैठ कर गजल गायकी कर रहे थे । बड़ा साहब की पसन्द के अनुसार राजदरबार जैसा स्टेज सजाया गया था । एक से एक कलाकारी की गई थी , पर वो सब देखने की फुरसत किसको थी ?
   इस उत्सव पर शहर के सभी गणमान्य व्यक्तियों को सपत्नीक बुलाया गया था । आखिर यही तो मौका होता है सबको बताने का कि हम क्या हैं ! लाॅन पुरूषों और महिलाओं के अलग अलग समूह बने थे । मंहगी साड़ियों और जेवरों से लदी फदी महिलायें कुछ तो वाकई खूबसूरत लग रही थीं और कुछ अपने को वाकई खूबसूरत समझ रही थी । इस पार्टी के एक महिने पहले से ही महिलाओं ने इसकी तैयारी शुरू कर दी थी । बाजारों के कई चक्कर लगे , ब्यूटी पार्लर के कई चक्कर लगे । हर महिला को अपनी शापिंग और मेक अप पर भरोसा था कि ये दोनो उसे रौनक ए महफिल बना हि देंगे ।
       पार्टी जोरशोर से चल रही थी । सब लोग अपने हाथ मे शीतल पेय का गिलास या और कोई ‘ पेय’ का गिलास लेकर आपस मे बात चीत करने मे तल्लीन थे ।  सिर्फ दो चार लोग को छोड़ कर किसी को भी गजल गायक की सुमधुर गायकी का आनन्द लेने की फुरसत नही थी । ऐसा लग रहा था कि इतने बड़े कलाकार को बस माहौल बनाने के लिये ही बुलाया गया था । इस बात का एहसास शायद उन कलाकारों को भी था । इसीलिये वे आपस मे ही ,आँखों ही आँखों एक दूसरे को दाद देते जा रहे थे ।
 पर अपने बड़े साहब की भी दाद देनी पड़ेगी क्योंकि उनके आदेश के अनुसार एक बन्दे की स्टेज के बगल मे ही ड्यूटी लगा दी गई थी । जैसे गजल गायक की एक गजल समाप्त होती वो बन्दा तालियों की गड़गडाहट का रिकार्ड बजा देता ( ( ठीक वैसे ही जैसे टीवी कामेडी शो मे हंसी ना आने वाले डायलाग पर भी लोगों की पहले से रिकार्डेड हंसी बजा कर लोगों को बताया जाता कि अब उनके ये हंसने का क्षण है और उन्हे भरपूर हंस लेना चाहिये ।)यहाँ भी ऐसा ही हो रहा था कि
 तालियों की आवाज सुन कर सभी अथिति चौंक जाते और बगैर सोचे समझे वे भी तालियाँ बजा देते ।
    लेकिन गायक महाशय ने थोड़ी हि देर मे ये जान लिया कि ये हो क्या रहा है । वे हल्के से मुस्करा कर अपनी दूसरी गजल का तराना छेड़ देते । आखिर उन्हे भी तो धन की जरूरत थी अपना घर चलाने के लिये और उनके सजिन्दों का घर भी तो इसी तरह के और भी कई कार्यक्रमों मे मिले धन से चलता था । गायक महाशय भी यही कुछ सोच कर अच्छे से अच्छा गारहे थे जैसे कि वे रियाज कर रहे हों उस प्रोग्राम के लिये जहाँ बैठा एक एक बन्दा बड़ी गम्भीरता से उनको सुन रहा हो और उनकी गायकी का दीवाना होकर बार बार उनको दाद दे रहा हो ।

नाइटी-२ -और पालिटिक्स शुरू

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पार्टी में पुरूषवर्ग हाथ मे गिलास लिये अगले साल के लिये कम्पनी के उत्पादन और कम्पनी की दूसरी इकाईयों के बारे मे बोरिंग बातें करने मे व्यस्त था । गौरतलब ये बात थी कि यहाँ छोटे बड़े ग्रुप बने हुए थे हर ग्रुप मे सीनियर लोग यानी कि बाॅस लोग ही बोल रहे थे जूनियर बन्दे सिर्फ मुँह से ‘ यस सर ‘ या ‘ सर ‘  ‘ सर ‘ की आवाज ही मुँह से निकाल पा रहे थे ।
महिला वर्ग के बीच हि जरा जिन्दगी का चटपटा पन देखने को मिल पा रहा था । जैसे कि —
क बोली – ” अरे आज जरा तड़क भड़क वाला आरकेस्ट्रा बुलवाना था । ये डीप मीनिंग वाली गजलें कौन सुनता बैठा रहेगा ?”
ख ने उसे झिड़का – “अरे धीरे बोलो यहाँ सिर्फ दीवार के कान नही सब ओर कान ही कान हैं , किसी ने सुन लिया और उपर तक बात पहुँच गई तो लेने के देने पड़ जायेगे । तू बोलने वाली और मै सुनने वाली दोनो ही नप जायेंगे । मै तो अभी ट्रांसफर नही चाहती इस साल मेरी बेटी का बोर्ड का साल जो है ।”
क- ” अरे मैने ऐसा क्या कह दिया ? ”
ख- “क्या नही कहा ! यहाँ सबको मालूम है कि ये गजल गायक बड़े साहब की खास पसन्द है ।”
क-” ओ साॅरी साॅरी ”
उधर ग अपना आई मेकअप सबको दिखाने के लिहाज से चश्मा नही लगा कर आई थी । और घोरतम वेजिटेरियन महिला बकरे की कलेजी से बना व्यंजन ट्रे से उठा कर खा गई और बोली ” ये मन्चूरियन का टेस्ट कुछ अलग सा है ”
मिसेज प और फ ने ये देखा । प ने ग को रोकना चाहा और वो कुछ बोलने वाली थी कि फ ने उसे रोक दिया और बोली ” कुछ मत बोल वरना ये अभी उलटी करने लगेगी , माहौल खराब हो जायेगा । इसे यहाँ से सीधे हास्पिटल भेजा जायेगा

और हम दोनो को भी साथ जाना पड़ेगा क्योंकि हम लोग इसके अड़ोस और पड़ोस मे रहतें हैं । हम यहाँ पार्टी इन्जाॅय करने आयें हैं कि हास्पिटल जाने आयें हैं ”
प तो बस फ की दूरदर्शिता की कायल होकर बोली ” हाँहाँ अभी चुप रहतें हैं पर फिर कभी मौका देख कर बोलेंगे और बोलेंगे जरूर ! इसको नीचा दिखाना जरूरी है क्योंकि ये अपने आप को बहुत बनती है ” दोनो हंसने लगी ।
मिसेज च और छ दोनो एक सी ही साड़ी पहिन कर आ गईं थी । नीले बार्डर वाली गुलाबी साड़ी । दोनो को बड़ा मलाल हो रहा था । सब लोग उन्हे पक्की दोस्त और जुड़वाँ बहन का खिताब देने लगे । दोनो कोशिश कर रही थीं कि आसपास ना रहे पर पता नही कैसे दोनो बार बार पास पास ही हो जाती ।
मिसेज ज छेड़ने के लिहाज से च को बोली ” तुम तो कह रही थी कि तुम कोई डिजाइनर साड़ी पहन कर आ रही हो पर ये क्या ? तुम दोनो तो किसी एयर लाइन्स की एयर होस्टेज बन कर चली आई हो ”
च निराशा भरे स्वर मे बोली ” बुटीक वाली ने मुझे यही कह कर इतनी मंहगी साड़ी बेची , पर मुझे क्या पता था कि वो झूठ बोल रही है ।वे तो कुछ भी बोल कर अपना माल बेच देते हैं और हम भोलेभाले लोग बेवकूफ बन जातें हैं ”
मिसेज ज ” हाँ हाँ ये तो है ही ” साथ ही मन मे सोच रही कि ‘ अरे जाओ जाओ ना तो तुम भोलीभाली हो ना ही बेवकूफ हो , तुम्हे तो हम जानते हैं अच्छे से ‘
एक ओर मिसेज छ अन्य महिलाओं के ग्रुप मे अपनी सफाई दे रही थीं कि ” मेरी ये साड़ी तो बहुत पुरानी है आज पता नही मेरा मन कैसे कर गया इस साड़ी को पहिनने का , और मैने निकाल ली ”
सारी महिलायें बड़े ध्यान से साड़ी को देखने लगी  जो कहीं से भी पुरानी नही लग रही थी । तभी मिसेज झ ने आगे बढ़ कर पल्ले से लटकता प्राइस टैग अलग किया और हाथ मे लेकर बोली ” आप तो कह रही थी कि ये साड़ी पुरानी है पर आपने तो इसका प्राइस टैग भी अलग नही किया । इस पर तो बुटीक का नाम भी लिखा है और दाम भी । काफी ज्यादा दाम है । आपने मोलभाव तो किया होगा या इतना ज्यादा दाम देकर ये साड़ी खरीद ली ? क्योंकि दाम के अनुसार तो साड़ी ऐसी नही दिख रही ”
अब छ को तो काटो तो खून नही वाली बात हो गई । झ को गुस्से मे देखते हुए मन मे सोची ‘ तूने आज मेरी इस तरह खिल्ली उड़ाने की कोशिश की है ,उसका बदला मै जरूर लूँगी , तेरी बेटी का आजकल जो प्रेमप्रसंग चल रहा है उसके बारे मे जब तक पाँच सात घरों मे बता ना लूँ तब तक मै अपने बालों मे शेम्पू नही करूँगी ”
तभी उद्घोषणा हुई ” लेडीज एन्ड जेन्टलमेन ! आज की शाम हम एक गेम खेलने जा रहे हैं जिसके परिणाम स्वरूप हम ‘मेड फार ईच अदर ‘ या परफेक्ट मैच वाले जोड़े को चुनेंगे । आपके हाथ मे पेपर और पेन दिया जा रहा है । पेपर मे ऊपर की ओर आप अपना और अपने जीवन साथी का नाम लिखिये । नीचे बीस छोटे छोटे प्रश्न हैं जो आप दोनो की पसन्द नापसन्द के बारे मे पूछे गयें हैं । आप से गुजारिश है कि आप सोच समझ कर सबके जवाब दें। जितने ज्यादा उत्तरों के मैच मिलेंगे आप खिताब के उतने ही नजदीक होंगे ।आपको इसके लिये दस मिनट का समय दिया जाता है और आपका समय शुरू होता है अब !  ” गुड लक एवरीबडी ! शुभकामनायें !

नाइटी-३ -मजेदार प्रतियोगिता

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सबके हाथ मे पेपर और पेन थे ।सभी को समझ नही आ रहा था कि क्या जवाब दें । प्रश्न तो सभी सरल थे , लेकिन लाॅन के दूसरी तरफ बैठा जीवनसाथी भी अपने पेपर यही कुछ लिख रहा था ,उसके लिखे से ये उत्तर मैच  होंगे ,तभी सही जवाब माना जायेगा , वरना कोई फायदा नही ।
मुँह मे पेन दबा कर क बोली – ” मैने तो कभी पता ही नही किया कि मुझे क्या पसन्द है और उन्हे क्या पसन्द है , जो मिला उसी मे अपनी पसन्द ढूँढ ली । ”
ख ने हाँ मे हाँ मिलाई -” कुछ पसन्द का तो चलो पता है जैसे कलर की पसन्द , खाने की पसन्द पर परफ्यूम का तो मुझे आइडिया ही नही ”
ग बोल पड़ी – भई मेरे पतिदेव तो ना परफ्यूम खुद पसन्द करते हैं ना ही मुझे पसन्द करने देते हैं । मेरा तो ये वाला काॅलम तो खाली ही जायेगा ”
तभी घ कुछ चिन्तित सी होकर बोली – ” इनकी तो जिन्दगी बस मशीनो के पुरजे बनाने मे ही बीत रही है । जो देदो खा लेंगे , जो दे दो वही पहिन लेंगे । गीत संगीत सुनने का टाइम कहाँ ? ये प्रश्न तालिका तो हम लोग के साथ किया गया एक मजाक सा लग रही है ”
च हंस कर बोली – ” अजी फेवरेट कलर पूछा है , अपना तो मुझे पता है कि मुझे पीला रंग बहुत पसन्द है पर इनका ?इनको तो लाल पेन्ट और हरी कमीज पहना कर तोता बना कर बाजार सब्जी लाने भेज दो तो चले जायेंगे और थैला भर सब्जी ले भी आयेंगे ” ये सुन सब हंसने लगे ।
छ लिखना छोड़ कर बोली -“इसमे फेवरेट फिल्म स्टार पूछा है । पहले तो मुझे धर्मेन्द्र पसन्द था पर जबसे उसने हेमा से दूसरी शादी करी मैने उसे पसन्द करना छोड़ दिया और फिर उसके बेटे सन्नी देवल को अपना फेवरेट बना लिया । पर इस बात का उनको तो पता है ही नही ” ।
यह सुन कर ज बोल पड़ी -” यही दिक्कत तो मेरे साथ भी है पहले इन्हे माधुरी दीक्षित पसन्द थी पर अब करीना कपूर के पीछे पड़े हैं , अब मै कौन सी लिखूँ ?”
झ की परेशान होकर बोली ” अब पीने मे क्या पसन्द है पूछा है । मुझे तो खूब ज्यादा मीठी चाय पसन्द है , ये तो उनको अच्छे से पता है पर उन्हे क्या पसन्द है ?,इतने साल बाद भी मुझे क्लीयर नही है ”
अब तक लिखने मे व्यस्त प बोल उठी -” सात आठ प्रश्नो मे तो हम दोनो को पक्का पता है कि मुझे क्या पसन्द है और उन्हे क्या पसन्द पर यहाँ तो पूरे बीस प्रश्न हैं बीस !”
फ व्यंग्य से हंसते हुए बोल पड़ी -” पूछा है फेवरेट हिल स्टेशन कौन सा है ? अरे क्या इनको पता नही कि हम लोग मे कुछ ऐसे भी हैं जो एक भी हिल स्टेशन नही गये हैं । मजाक बना रहे हैं हमारा ! चलो कोई भी जवाब लिख दो लग गया तो तीर वरना तुक्का । सब लाटरी जैसा ही लग रहा है । सब लक वाला मामला ”
लेकिन जहाँ ये ग्रुप इसे भाग्य की बात मान कर टाल रहा था वहीं कुछ लोग सोच सोच कर याद कर कर के जवाब लिख रहे थे । ठीक दस मिनट बाद सबने ट्रे मे सारे पेपर जमा कर दिये और डिनर के लिये चल दिये ।
डिनर के बाद सब पान चबाते वापस लाॅन मे विराजमान हो गये। तभी क्लब के सेकेट्री ने माइक पर बोलना शुरू किया -“लेडीज एन्ड जेन्टिलमेन अब हम उस लकी विनर कपल का नाम एनाउन्स करने जा रहे हैं जो विजेता होने के साथ साथ ‘मेड फार ईच अदर ‘ का खिताब भी जीतने जा रहा है ।हम इस सुन्दर जोड़े का तह ए दिल से सम्मान करते हैं और बधाई देतें हैं । आपकी जानकारी के लिये हम आपको बता दें इस जोड़े ने पूरे बीस प्रश्नों का उत्तर दिया और पूरे के पूरे उत्तर आपस मे मैच कर गये । ये आश्चर्यजनक है लेकिन सत्य भी है । इसका यही मतलब है कि इन दोनो पति पत्नी मे गहरी अंडरस्टेडिंग है । अब तक आपके मन मे जोरदार उत्सुकता उठ गई होगी कि आखिर ये जोड़ा कौन सा है ? हम उस जोड़े का नाम बताने जा रहे हैं । वो हैं मिस्टर रविकान्त और उनकी पत्नी मिसेज नीता !
रवि और नीता से हमारी गुजारिश है कि वे स्टेज पर आयें और हमारे सीईओ साहब और मेडम के हाथ से सम्मान ग्रहण करें। सब लोग जोरदार तालियों से इनका सम्मान करें ।”
रवि और नीता जब स्टेज पर जा रहे थे तो पीछे से एक प्यारी सी विजेता वाली धुन बजाई जा रही थी । स्टेज पर बड़े साहब और मेडम ने रवि नीता को ‘मेड फार ईच अदर ‘का ताज पहनाया  और बहुत ही कीमती पुरस्कार प्रदान किया।
इसके बाद सीईओ साहब का भाषण हुआ , जिसमे कम्पनी के अच्छे उत्पादन के लिये सबको बधाई दी और रवि की स्पेशल तारीफ की जो सबको नागवार गुजर रही थी ।
जब स्टेज से उतर कर रवि और नीता लोगों के बीच आये तो सबने ऊपरी मन से बधाई दी । एक महिला तो बधाई दे रही थी साथ ही सोच रही थी ‘ मन तो कर रहा है कि तुमको धक्के मार कर गिरा दूँ । आखिर तुम इस पार्टी मे आई ही क्यों ?’और तुरन्त मुड़ कर  दूसरी महिलाओं की ओर मुँह करके गहरी सांस लेकर बोली ” चले !रात काफी हो गई है । कल बात करते हैं “।

नाइटी-४ -उफ ! इतनी प्रतियोगिता

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‘कल’ यानी कि आज के दिन तो परिसर मे जैसे भूचाल ही आया हुआ था । सब घरों मे फोन लगातार घनघना रहे थे । बातें करने वाली महिलायें ही थी । सभी गुस्से से भरी थीं । सब यही सोच रही थी कि बीती रात का सम्मान केवल उनके लिये ही था । रवि नीता को ये सम्मान देना सर्वसम्मति से लिया गया गलत निणर्य ही था । बातें कुछ इस प्रकार थी –
क- देखा कल किस तरह पेपर लीक करा के चमचों को फायदा पहुँचाया गया !”
ख- हाँ हाँ बेशर्मी तो इतनी कि पूरे के पूरे बीस उत्तर मैच कर गये ।मुझे तो तभी से शक होने लगा था कि ये पेपर लाक होने वाला मामला है ।
ग- कुछ पता है तुम लोग को कि ये रविकान्त महाशय बड़े साहब के नजदीक वालें हैं । नीता जब ना तब उनके बच्चों को फ्री की ट्यूशन देती है । उसी का नतीजा है ।
घ- मुझे तो सेकेट्री पर बहुत गुस्सा आ रहा है । एक ओर रवि नीता को चालाकी से प्राइज दिया जा रहा था और हम लोग से बोला जा रहा था कि आप लोग इस सुन्दर जोड़े का जोरदार तालियों से स्वागत करिये । सुन्दर जोड़ा ? माई फुट !
च- सुन्दर जोड़ा तो इस तरह बोल रहे थे कि जैसे इनसे सुन्दर और कोई नही ! अरे मुझे और इनको साथ देख कर लोग बोलते हैं कि इतना सुन्दर जोड़ा पहले कभी नही देखा ! मेरे आगे तो नीता कुछ भी नही है । मैने तो अभी तक फिगर मेन्टेन की है जबकि नीता तो मोटी हो गई है ।
छ- ( च की खुद का बड़बोला पन पर मुँह बिचकाई फिर बोली ) – अरे सिर्फ कुछ प्रश्नों के उत्तर देकर कोई ‘ परफेक्ट मैच ‘ नही हो जाता । मै तो कहती हूँ कि ये क्राइटेरिया ही गलत था । कोई मेरे घर आकर देखे कि किस तरह प्यार से रहतें हैं । हम अपने आप मे ‘ मेड फार ईच अदर ‘ हैं अब कोई माने या ना माने !
ज- मुझे तो बड़ा बुरा लगा जब बड़े साहब ने रवि की स्पेशल बड़ाई की कि जैसे सिर्फ एक वही काम करते हैं । हमारे पति लोग तो बेकार के लोग हैं । कुछ भी काम नही करते , बस बेकार की तनखा खातें हैं ।
झ – मेरे ये तो कल से इसी बात को लेकर इतना गुस्सा हैं कि कह रहें हैं कि मै नौकरी छोड़ दूंगा । आखिर इतना काम करके भी क्या मिला ?  अब मै वहीं जाॅब करूँगा जहाँ मेरी और मेरे काम की कदर की जाय । पर क्या करें जब तक बच्चों के स्कूल की पढ़ाई आड़े आती है ।
प- मेरे ये तो कह रहे थे कि अगर मै काम ना करूँ तो पूरा का पूरा उत्पादन ही रुक जाय । ताला लग जाय ताला !!
फ- मुझे तो सारा षड़यन्त्र भरा मामला नजर आ रहा है । बड़े साहब ने अपने चमचे को चमचागिरी का रिवार्ड दिया । इसमे सेकेट्री की मिली भगत नजर आ रही है , क्योंकि उसका खुद का प्रमोशन ड्यू है । समझ गये ना ??
इन सब जहरीले संवादों से अनजान नीता रवि खूब खुशी मना रहे थे । ये बात अलग है कि नीता इस तरह के गेम के बारे मे बहुत पहले से जानती थी और घर मे दो एक बार वो रवि के साथ ये गेम फन के लिये पहले भी खेल चुकी थी ।संयोग की बात है कि कल की पार्टी मे भी यही गेम रखा गया था और रवि नीता ने बाजी मार ली थी ।पर रवि नीता आपस मे प्यार भी बहुत करते थे और एक दूसरे का सम्मान भी ।ये भी सच था कि नीता रवि की बड़े साहब और उनकी मेडम से दोस्ती थी । नीता कभी कभी उनके बच्चों की पढ़ाई मे मदद भी कर दिया करती थी ।
अगले दिन नीता ने सेलिब्रेशन के लिये घर पर ही खूब अच्छा खाना बनाया घर के डाइनिंग टेबल पर केन्डल लाइट डिनर का इन्तजाम किया आखिर पुरस्कार मे मिले सुन्दर से बोन चाइना के डिनर सेट का उद्घाटन जो करना था ।
दूसरे दिन सुबह दफ्तर जाते समय रवि ने नीता को कहा कि  दोपहर की फ्लाइट से कोलकाता जाना है , जरा उसका सूटकेस लगा दिया जाय। रवि के जाते ही नीता ने अलमारी के ऊपर रखे सूटकेस को निकाला ,उसे खोला । उसके साइड के पाकेट की जिप नही खुल रही थी । किसी तरह कोशिश करके जिप खुली तो अन्दर से हल्के हरे रंग की नाइटी का इनर निकला । अरे ये किसकि नाइटी का इनर है ? आश्चर्य ! घोर आश्चर्य !!!

नाइटी-५ -ये किसकी नाइटी ?

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नीता हाथ मे नाइटी लेकर गहरी सोच मे पड़ गई । उसने आदमकद शीशे के आगे अपने से नाइटी को लगा कर देखा । साइज मे बहुत फरक था । यानी किसी बहुत पतली महिला की नाइटी थी । नाइटी का रंग रवि का फेवरेट रंग था । उपर की ओर स्मोकिंग की कढ़ाई की गई थी । नाइटी देख देख कर नीता के मन मे बस यही ख्याल आ रहा था कि रवि उसे धोखा दे रहा है । यहाँ मेरे और बच्चों के प्रति प्यार का नाटक किया जा रहा है और दूसरी ओर गर्ल फ्रेन्ड भी रखी जा रही है । एक मिनट एक मिनट ये गर्ल फ्रेन्ड आखिर कहाँ की है ? जरूर कोलकाता की होगी तभी जनाब भाग भाग कर बार बार कोलकाता जातें हैं । मेरे को बहाना बनाया जाता है कि कि यहाँ इस यूनिट मे नया प्रोजेक्ट आ रहा है ,उसी सिलसिले मे मुझे बार बार मीटिंग के लिये बुलाया जाता है ।
 नीता का शक गहराता जा रहा था ।बड़ी तेजी से उसके दिमाग मे बातें आती जा रही थीं । उसे याद आयाकि कैसे उसकी शादी तय हुई थी । नीता धनी घर की थी पर रवि उतने  धनी घर का नही था । नीता की माँ इस रिश्ते से पीछे हट रही थी पर नीता को रवि  बहुत पसन्द था । पिता को भी रवि पसन्द था । असल मे रवि नीता की सहेली का बड़ा भाई था , बहुत पहले से ही दोनो एक दूसरे को पसन्द करते थे ।शादी से पहले ही नीता ने रवि के आगे सिर्फ एक शर्त रखी थी कि ‘ मुझे बेवफाई बिलकुल नही पसन्द है । अगर जिन्दगी के किसी मोड़ पर ऐसा मनमुटाव हो जाय आपस मे बात करके सुलझा लो पर एक दूसरे को धोखा बिलकुल ना दो । इस रिश्ते मे ईमानदारी पहली शर्त है , ऐसा मेरा मानना है ‘ ।
    तो रवि ने जवाब दिया था ” तुमने ऐसा सोचा भी क्यों कि मै तुम्हे कभी धोखा भी देसकता हूँ ! तुम्हारे सिवाय ना मुझे कोई पसन्द था और ना होगा । बस दिल दिमाग मे तुम ही तुम छाई रहती हो ऐसे मे मै किसी दूसरे के बारे मे सोच भी कैसे सकता हूँ ? हाँ मुझे तुमको खोने का डर बना रहता है “
नीता – ” वो कैसे ?”
रवि – ” तुम इतनी अधिक सुन्दर जो हो । कोई छैल छबीला तुम पर लाइन मारने लगे तो मै तो बिलकुल बर्दाश्त नही कर पाँऊगा “
अपनी सुन्दरता की बड़ाई सुन कर नीता को अच्छा लगा और वो शरमा गई ।
लंच के समय रवि घर आया । अनमनी सी नीता ने उसके साथ खाना खाया । उसने रवि का सूटकेस भी नही लगाया था ,रवि खुद सूटकेस लगाने लगा तो वहीं बेड पर पड़ी नाइटी को उठा कर दूसरी ओर रख दिया ,ये बोलते हुए कि ” अरे ये नाइटी यहाँ कैसे रखी है ?” रवि के चेहरे पर कोई भाव नही बदले । जबकि नीता ने जान कर वो नाइटी वहाँ रखी थी । अब नीता सोचने लगी – अच्छा तो जनाब जान कर भी अनजान बन रहे हैं । एक्टिंग करना तो कोई इनसे सीखे ।अभी चेहरे का भाव बदल जायेगा तो चोरी पकड़ी जायेगी । चोरी पकड़ी गई तो वो छम्मकछल्लो भी छूट सकती है । मै सब समझती हूँ मिस्टर रवि की तुम कौन सा खेल खेल रहे हो “
 रवि जब सूटकेस लेकर जाने लगा तो नीता जान कर उसी समय किचन मे जाकर कामवाली से बात करने लग गई ।
रवि ने एक बार नीता को देखा कि शायद वो बाहर छोड़ने आयेगी , तभी अपनी घड़ी देखी , देर हो रही थी अतः रवि हाथ मे सूटकेस लेकर निकल गया ।

नाइटी-६-चुप चुप ! कोई सुन रहा है

Nighty6

रवि के जाने के बाद नीता फिर से बेडरूम मे आकर नाइटी को देख कर परेशान होकर सोचने लगी ।
‘ शादी के पूरे बारह साल हो गये और ये रवि अब इस तरह धोखा दे रहा है ‘
नीता के दिमाग मे कई ऐसी बातें आ रही थीं जो इस बात को पुख्ता करती थीं कि रवि की कोलकाता मे कोई गर्लफ्ेन्ड है जैसे –
१- रवि का उससे बार बार ये कहना कि तुम मोटी हो रही हो । मुझे तो वो पहले वाली स्लिम ट्रिम नीता पसन्द थी ।
२- अपने दोस्तों से मजाक मे ये कहना कि यार कोलकाता की लड़कियाँ कितनी सुन्दर होती हैं  , इसको देखो कि उसको देखो ।
३- ये कहना कि मुझे कोलकाता शहर बहुत पसन्द है – ( अरे वहाँ तुम्हारी मिलनवी जो रहती है मिस्टर रवि !)
४- नीता तुम बंगाली स्टाइल की नारियल वाली मूंग की दाल बनवाओ और कभी कभी ‘बंगाल स्वीट’ से चमचम और रसगुल्ला भी मंगवा लिया करो । उसे खाने का बड़ा मन करता है । ( क्योंना करे मिस्टर रवि ! तुम्हारी स्लिम ट्रिम मिलनवी तुमको यही सब खिला कर खुश रखती होगी )
५- रवि का ये बोलना कि बंगाली भाषी कितनी मधुर होती है , लगता है कि मुँह मे रसगुल्ला डाल कर बोल रहे हैं ।वहाँ का गीत संगीत कितना मधुर होता है । और तो और जब ना तब कोलकाता से बांगला संगीत की सीडी लाना और और उसको इन्जाय करना ।
   चार दिन बाद कोलकाता से रवि खुशी खुशी लौटा । फिर वही कोई बांगला गीत की धुन गुनगुना रहा था । नीता चिढ़ गई । बच्चों को कोलकाता से लाई गिफ्ट देकर , बेडरूम मे जाकर सूटकेस खोला और नई साड़ी निकाल कर नीता को देते हुए कहा -“ये साड़ी तुम्हारे लिये । हल्के हरे रंग की साड़ी मुझे प्यारी लगी । इसलिये मैने खरीद ली “
 नीता ने साड़ी हाथ मे लेकर उदास मन से उसका हरा रंग देखा । उसे अच्छा नही लगा ,मन मे विचार आया कि ‘ और अपनी  मिलनवी को भी हल्के हरे रंग की साड़ी दी होगी जैसे कि नाइटी दी है
रवि- क्यों क्या साड़ी पसन्द नही आई ?
नीता- वो नाइटी किसकी है ?
रवि- कौन सी नाइटी ?
नीता – भोले मत बनो । वो नाइटी जो  जो तुम्हारे इसी सूटकेस के साइड पाकेट से निकली है ” और नीता ने अलमारी से नाइटी निकाल कर रवि के आगे कर दी ।
रवि -( नाइटी देख कर )-“अरे भई किसकी नाइटी का क्या मतलब है ? जब मुझे नही पता तो नही पता , तुम्हारी ही होगी”
नीता- “नही ये मेरा साइज नही है ।और ये नाइटी कुछ खास पुरानी भी नही लग रही ।
रवि- ” तुम्हारे कहने का मतलब क्या है ?”
नीता-“मतलब साफ है । ये जो तुम दौड़ दौड़ कर बार बार कोलकाता जाते हो । उसका मतलब साफ नजर आ रहा है । वहाँ तुम्हारी जरूर कोई गर्लफ्रेन्ड है ।”
रवि- “बकवास मत करो “
नीता-” मुझे बकवास करने की आदत नही है । मैने तुम्हारे कोलकाता वाले दफ्तर मे फोन किया तो वहाँ से जवाब आया कि साहब यहाँ आये ही नही हैं । मुझसे झूठ बोला जा रहा है और मेरा मुँह बन्द करने के लिये मुझे साड़ी गिफ्ट की जा रही है । रख लो ये साड़ी मुझे नही चाहिये अपनी उस मिलनवी को गिफ्ट कर देना ।”
रवि- ” मैने तुम्हे बताया तो था कि इस यूनिट मे एक बड़ा प्रोजेक्ट आ रहा है । उसी सिलसिले मे अलग अलग दफ्तरों मे मीटिंग चल रही है । इस बार एकाउन्ट वाले दफ्तर मे मीटिंग थी । चलते समय तुमने मुझको ये सब बताने का मौका ही नही दिया । मुँह फुलाये किचन मे चली गई , वरना मै बता कर जाता “
नीता -” मुझे मीटिंग और दफ्तर के बारे मे कोई सफाई नही सुननी । पहले ये बताओ कि ये नाइटी किसकी है ?”
रवि-” कहा ना कि मुझे नही मालूम “

नीता-” ये नाइटी तुम्हारे अपने सूटकेस से निकली है जिसे लेकर तुम बार बार कोलकाता जाते हो । ये नाइटी किसी की तो है और ये तुम्हारी बेवफाई का सबूत दे रही है । मैने तुमसे पहले ही कहा था कि सब कुछ सहन कर सकती हूँ पर बेवफाई नही ”

रवि-” अरे बेवफाई कौन कर रहा है ? तुम्हारा तो दिमाग ही खराब हो गया है ।”
 तभी दरवाजे पर घन्टी बजी । दोनो चुप हो गये । कामवाली ने बताया कि मिस्टर और मिसेज वरमा ( यानी कि च) आये हैं ।
रवि-” उनको ड्राइंग रूम मे बैठाओ , हम अभी आतें हैं ।