लुटेरा बंदर


लुटेरा बंदर

अपना नया नया रंगीन चश्मा यानी सनग्लास लगा कर पम्मी ने आदमकद शीशे के आगे अपने को निहारा तो वह अपने को निहारते ही रह गई , पूरा व्यक्तित्व ही बदला नजर आया , काले चश्मे को पहनने से उसके चेहरे की चमक और गोरापन दोनो और बढ़े से लग रहे थे । यह देख कर पम्मी का दिल बल्लियों उछलने लगा । अब इतनी ज्यादा खुशी के और भी कई कारण थे । जबसे पम्मी ने अपनी पसंदीदा हिरोइन को एक फोटो मे ऐसा ही चश्मा लगाए देखा था तभी से उसने वैसा ही चश्मा खरीद लेने की मन मे ठान ली थी पर ये ‘ ब्रान्डेड चश्मा ‘ बहुत ही अधिक महंगा था , और एकदम से इसे खरीद लेना पम्मी के बस की बात नही थी । “अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात ही उसे तुमसे मिलाने मे जुट जाती है ” बस तो फिर पम्मी रोज उस चश्मे का फोटो देख कर रोज ही ‘ ओम् शान्ति ओम् ‘ के इस डायलॉग को मन ही मन दोहराने लगी । साथ ही उसने कुछ महिने तक बचत की और जिस महिने किटी पार्टी मे उसे किटी के पैसे मिले तो दोनो को मिलाकर तुरन्त ही वो ब्रान्डेड ग्लासेज ले ने शो रूम चल पड़ी । चश्मा आ गया ! अपार खुशी ! पर एक बात जो बहुत महत्वपूर्ण थी कि , सभी सहेलियों के बीच इसका प्रदर्शन ! उसके लिए तो अगली किटी पार्टी मे जाना जरूरी था , पर इस पार्टी के लिए पूरे एक माह इन्तजार करना था , यानी कुछ धीरज रखना जरूरी था ।

 इसी बीच पम्मी के यहाँ कुछ रिश्तेदार आए और उन सबका वृन्दावन जाने का बन गया । वृन्दावन पम्मी के घर से ,चालीस किलोमीटर की दूरी पर था । टेक्सी से जाना तय हुआ । पम्मी खुशी खुशी नया चश्मा लगा कर उन लोग के साथ टेक्सी मे सवार होकर चल पड़ी । टेक्सी जब वृन्दावन मे मन्दिर परिसर के आगे रूकी । वहीं आगे दीवार पर बड़े बड़े अक्षरों मे लिखा था – चेतावनी : कृपया अपना मोबाइल ,पर्स चश्मा आदि बंदरों से बचा कर रखें – धन्यवाद । पम्मी इस चेतावनी पर ध्यान नही दे पाई क्योंकि पम्मी का मोबाइल बजने लगा , वो टेक्सी से उतर कर बड़े स्टाइल से मोबाइल पर बात करने लगी । तभी अचानक एक बन्दर बड़ी ही कुशलता से पम्मी का प्यारा चश्मा ले उड़ा ! मोबाइल पर बात करना छोड़ पम्मी बंदर के पीछे भागी । लेकिन तब तक बंदर सामने की ऊँची दीवार पर चढ़ गया । पम्मी आँखों मे आँसू भर कर बंदर से अपना चश्मा वापस करने की विनती करने लगी । पर बंदर तो काला चश्मा लगा कर अपनी दुनिया रंगीन करने मे लगा हुआ था ।

  तभी पता नही कहाँ से एक फ्रूटी बेचने वाला घटनास्थल पर प्रकट हो गया और कहने लगा ” बंदर को फ्रूटी पसन्द होती है आप उसे फ्रूटी दिखाओ , तो वो चश्मा वापस कर देगा ” बंदर का चश्मा लूटना और तुरन्त ही फ्रूटी बेचने वाले का आना -दोनो की ‘ टाइमिंग ‘ मे इतना सामजस्य था कि किसी को भी शक हो सकता था कि बंदर और फ्रूटी बेचने वाले मे कोई ‘ बिजनेस डील ‘ अवश्य हुई होगी । खैर पम्मी के हैरान परेशान पति हरकत मे आए और एक नही दो दो ( दो इसलिए कि तब तक बंदर का बच्चा भी आ गया था ) फ्रूटी खरीद कर दीवार के पास जाकर ” आ आ ये ले ले वो दे दे ” बोल बोल कर बंदर को ‘ एक्सचेंज अॉफर ‘ का लालच देने लगे । पर बंदर कहाँ मानने वाला ? पहले उसने चश्मा खुद पहना फिर बच्चे को पहनाया । बच्चे को चश्मा बहुत ढीला लगा उसने सिर हिला कर चश्मे को नकार दिया । तो बंदर ने चश्मा दो तीन टुकड़ों मे तोड़ कर दीवार के दूसरी ओर फेंक दिया । इधर किसी दूसरे बंदर ने झपट्टा मार कर पति महाशय के हाथ से फ्रूटी भी छीन ली । अपने प्यारे चश्मे का ये दुर्गति होते देख पम्मी के मुँह से एक चीख निकल गई । तभी उन लोग का ध्यान दीवार पर लिखी ‘ चेतावनी ‘ पर गया । उसे पढ़ कर क्रोध मे भरकर पम्मी लगभग चिल्लाने लगी ” अरे इस चेतावनी मे मोबाइल भी लिखा था । अरे नासपीटे हरामखोर बंदर ! ले जाना था तो मेरा मोबाइल ले जाता । मोबाइल वैसे भी पुराना हो गया था । तू मेरा चश्मा ले गया और उसे भी मेरे आगे तोड़ कर फेंक दिया । तेरा कभी भला नही होगा ! हाय अब मै किटी पार्टी मे सहेलियों को क्या दिखाउँगी ! हाय मेरा इतना मंहगा चश्मा ! उफ् !

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