इनकी कार उसका फ्लैट -५


धीरज कुमार जो पहले ही बहुत कम बोलते थे ,रिटायरमेन्ट के बाद और भी ‘ मौनी बाबा ‘ बन गए । तब तक इन्टरनेट का पदापर्ण हो चुका था और वो धीरज कुमार के लिए बहुत बड़ा मित्र और सहायक सिद्ध हुआ ।

 एक दिन धीरज कुमार ऐसे ही टीवी पर समाचार देख रहे थे , टीवी पर एक समाचार दिखाया जा रहा था कि किसी के घर सीबीआई का छापा पड़ा , संयोगवश वो अधिकारी धीरज कुमार का मुलाकाती निकला । वे उत्तेजनावश चिल्ला उठे ” देखो शान्ति जल्दी आओ , रमाकान्त जी के घर सीबीआई का छापा पड़ा है ”

“अरे कहाँ कहाँ ?” अरे अरे कहती हुई शान्ति देवी किचन से तेजी से दौड़ती हुई चली आईं और कौतुहल से टीवी स्क्रीन पर नजरे गड़ा दी ।

” देखो तो जरा रमाकान्त कैसे मुँह लटकायें है ? और रजनी ( रमाकान्त की पत्नी ) को तो देखो जरा , कैसे रोने रोने को हो रही है , अरे देखो नल्ली की प्योर सिल्क की साड़ी घर पर पहने हुए है । हम तो सूती साड़ी पहनती हैं । ”

तभी टीवी पर अगला सीन दिखाया गया कि सीबीआई वाले रमाकान्त का हाथ पकड़ कर ले जा रहे हैं ।ये देख कर शान्ति देवी फिर से चिल्ला उठीं ” अरे रजनी एक छोटा सा तौलिया तो दे देती अपने पति को । ऐसे मे लोग तौलिये से मुँह छिपा कर जाया जाता है । देखो कैसा नंगा चेहरा लेकर जा रहे हैं बेचारे रमाकान्त जी ! ये रजनी को तो जरा भी बुद्धि नही है ” इतना कह कर वे वापस किचन मे चली गई ।

धीरज कुमार ने टीवी बन्द कर दिया और उठ कर दीवार से अपने दिवंगत पिताजी की फोटो उठाई और उसे ले जाकर पीछे वाली बालकनी मे टांग दिए । बोले ” बस पिताजी आप यहीं रहने लायक हो , पचास हजार दहेज लेकर मेरी जिन्दगी ऐसी तैसी करने की यही सजा मै आपको दे सकता हूँ ” फिर धीरज कुमार गुस्से मे अपनी दोनो हथेलियाँ रगड़ते हुए बड़बड़ाने लगे ” अजीब महिला है ये ! इसको इस बात से कुछ लेना देना नही कि रमाकान्त कैसा आदमी निकला ! ये तो बस नल्ली सिल्क की साड़ी और नंगा चेहरा देख रही है ”

    धीरज कुमार को फिर से नई कार खरीदने का शौक वापस आ गया । वे सारा समय इन्टरनेट पर नए नए माडल की सुन्दर कारें देखने लगे । कार डीलरों को और बैंक वालों को फोन करने लगे । उनको ऐसा करते देख शान्ति देवी का माथा ठनकने लगा ।

एक दिन अचानक फोन की घन्टी बजी ।धीरज कुमार ने फोन उठाया । उधर से आवाज आई ” मै टुन्ना कुमार बोल रिया ”

” कैसे याद किया टुन्ना कुमार ?” धीरज कुमार बुरा सा मुँह बनाते हुए बोले ।

“” ऐसे ही हाल चाल जानने को । इत्ते साल हो गए । मेडम का फोन आया था तो पता लगा कि आप नई कार खरीदने वाले है ? अरे साहब मत खरीदो । एक बार तो आप कार खरीद कर फंस चुके हैं । दुबारा काई कू अपने को खाली पीली मुसीबत मे डालना । मेरा बेटा टेक्सी चलाता है , जब चाहे तब उसको बुलाओ ”

” वो बाद की बात है , तुम बताओ कि तुमने फोन क्यों किया था ? लगभग दाँत पीसते हुए धीरज कुमार बोले ।

” आपको बधाई सर जी ! मेरा फ्लैट अब एक करोड़ रूपये का हो गया है ! ये बताने को सर जी ”

धीरज कुमार ने गुस्से के मारे फोन पटक दिया । गुस्सा इतना कि पास की टेबल पर जोर से एक मुक्का मारा और चिल्ला कर बोले ” घर मे कोई है तो वो कान खोल कर सुन ले ! मै कोई कार वार खरीदने नही जा रहा हूँ “

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