ट्रबलशूटर ( The Trouble Shooter )

                          बात उन दिनो की है जब हम लोग मध्य भारत के एक हरे भरे शहर मे रहते थे । पति एक सरकारी संस्थान मे काम करते थे और हम लोग सरकारी बंगले मे रहते थे । ये बंगला करीब सौ साल पुराना था । अकेला बना बंगला पीपल , नीम , आम के ऊँचे ऊँचे पेड़ों से घिरा था । कमरों की दीवारें बेहद ऊँची और मोटी थी , छत खपरैल की थी और अन्दर ‘फाल्स सीलिंग ‘ थी । कमरे इतने बड़े कि बीस पच्चीस लोग आराम से बैठ कर पिक्चर देखने का आन्नद ले लें ।पहले तो ऐसे घर मे रहना बड़ा अजीब सा लगता था पर धीरे धीरे आदत हो गई ।

   एक शाम की बात है , बच्चे बाहर लॉन मे आसपास के अन्य बच्चों के साथ खेल रहे थे कि अचानक उन लोग ने घर की छत पर एक लम्बा सा सांप मटरगश्ती करते देखा । बच्चों ने चिल्ला कर मुझे बुला कर दिखाया , मेरे देखते देखते सांप जी छत की खपरैलों के बीच गायब हो गये ! अब इसके तुरन्त बाद ही मेरा मानसिक तनाव हदें पार करने लगा क्योंकि एक तो पति महाशय एक महिने के लम्बे कोर्स पर दूसरे शहर गए हुए थे , दूसरा रंग देख कर लग गया था कि सांप खासा जहरीली प्रजाति का था , तीसरे पुराना घर होने के कारण सीलिंग जगह जगह से टूटी हुई थी , यानी सांप महोदय किसी समय भी अन्दर कमरे मे पदापर्ण कर सकते थे , ये उनकी इच्छा पर निर्भर करता था ।

    अब क्या करें ? रात को तो कुछ हो नही सकता था । बच्चे बहुत छोटे थे , वे तो सो गए पर मैने पूरी रात जाग कर गुजारी , घर की सारी बत्तियाँ जला कर रखी । सुबह फायर ब्रिगेड वालों को मदद के लिये बुलाया । उन लोग ने जो उपाय बताया वो मेरे लिये मुश्किल ही नही नामुमकिन ही था , वो ऐसे कि वे लोग सांप ढूंढने के लिये घर की सारी छत तोड़ने जा रहे थे । मैने उनसे पूछा कि सांप विदा करने के बाद क्या वे लोग तुरन्त छत वापस मरम्मत कर बना देंगे ? तो उन लोग ने इन्कार कर दिया ।

  अब क्या करें ? बरसात का मौसम शुरू हो चुका था , टूटी छत के साथ तो गुजारा नही था , वो भी छोटे बच्चों के साथ ।तभी एक शुभचिंतक एक तान्त्रिक महाशय को बुला लाया जो सांपों पर अच्छा खासा कंट्रोल रख लेते थे ।सिर पर एकदम सफेद बाल , सफेद दाढ़ी , सफेद कुरता पायजामा और सफेद जूते , उनका व्यक्तित्व देख पूरा विश्वास हो गया कि ये जरूर छूमंतर से सांप को वश मे करके कहीं और भाग जाने का आदेश दे देगे । उन्होने तुरन्त ही अपने झकझक सफेद कुरते की जेब से कुछ चने निकाल कर घर की दीवार के पास जमीन मे गाड़ दिये और कहा -” बेटी अब सांप यहाँ नही रह सकता , अब तुम्हारे घर के आसपास भी इस प्रकार के जीव नही आयेंगे । मैने पूरे घर को बांध दिया है ” वे तुरन्त मुड़े और वापस चल दिये । हमने नतमस्तक होकर राहत की सांस ली । पर शाम को फिर से छत के एक कोने से लटकी हल्की सी पूँछ ने तान्त्रिक महाशय के चनों को अँगूठा दिखा दिया । दूसरी रात भी मैने जाग कर काटी ।

     अगली सुबह मैने सोच लिया कि अब छत तुड़वाने के अलावा और कोई चारा नही । तभी गेट पर बकरी चराने वाली बाई अपनी बकरियों के साथ आ कर बैठ गई । हमेशा की तरह मैने उसको चाय दी और अपने लटके मुँह का कारण बताया । उसने तुरन्त कहा -” अरे बिटिया एमा इत्ता परेसान होने की का बात है ? कमरा मे धुआँ करो , सांप तुरन्ते भाग जाब । हम लोगन तो ईसी तरहा आपन झोपड़िया से जीव जनावर भगात हैं ” उस समय मुझे बकरी बाई का झुर्रियों से आच्छादित , दन्तविहीन और बिखरे बालों वाला चेहरा दुनिया का सबसे खूबसूरत चेहरा नजर आ रहा था ।

       मैने कुछ लोग को लगातार छत निहारने को कहा और कमरे के अन्दर खूब धुआँ किया । कुछ ही मिनटों मे मे सांप जी छत से कूद कर सरपट भागते हुए पता नही कहाँ गायब हो गए । घनी राहत जी राहत !!

    वो जो कहावत है कि – जो काम तलवार नही कर सकती वो एक सूई कर सकती है – पर उसके लिए हमे सूई के महत्व को अच्छे से मानना होगा ।

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