एक उंगली और तीन उंगली के इशारे ( पार्ट १ ) Gestures: One Finger, Three Fingers (Part 1)

OnefingerThreefingers

दीपक देश के नामी गिरामी इंजीनियरिंग कालेज के छात्र थे । काॅलेज के नाम से ही दीपक के व्यक्तित्व की गारिमा बढ़ी हुई थी । स्वयं दीपक का मस्तक गर्व से ऊँचा था । तेजस्वी दीपक की उपलब्धियों से उसका पूरा परिवार भी समाज मे बहुत इज्जत पा रहा था ।
उन दिनो दीपक की बड़ी बहन के डाक्टर पति की पोस्टिंग एक गांव मे थी । माँ ने दीपक को चिट्ठी लिख कर सुझाव दिया कि परीक्षा होने के बाद वो बहन के घर होता हुआ आये । माँ के कहे अनुसार दीपक  परीक्षा समाप्त होते ही बहन के घर चल पड़ा । गाँव बहुत ही मनोरम था । इतनी शान्ति , हरियाली और ताजगी भरा वातावरण शहर वालों को कहाँ नसीब !
कुछ दिन खुशी खुशी गाँव मे अपने बहन व जीजा के साथ बिताने के पश्चात दीपक ने घर जाने की इच्छा जतायी । बहन ने भी प्यार मे भर कर गाँव की खेती की उपज जैसे चना , तरह तरह की दाले ,शुद्ध गुड़ , नारियल , सत्तू , घी आदि दीपक को बांध कर दी साथ ही एक झोले मे कच्चे आम भी अचार बनाने के लिये भर कर दिये ।
दीपक भाई बस मे सवार होकर वापस घर की ओर चल दिये । पूरे चार घन्टे का बस का सफर था । दीपक ने अपना पूरा सामान बस की सीट के नीचे  जमा कर रख दिया । बस चल दी । थोड़ी देर बाद दीपक ने ध्यान दिया कि उसकी नाक दुर्गन्ध से परेशान हो रही है । दीपक को अपने बाजू मे बैठे ग्रामीण व्यक्ति पर शक हुआ । हो ना हो यही बदबू मार रहा है । उफ् ये गाँव वाले भी ना ! पता नही ये साफ क्यों नही रहते ? दीपक ने सारे गाँव वालों के खिलाफ सोचना शुरू कर दिया । तभी बस एक स्टाप पर रुकी और वो गाँव वाला सहयात्री अपना सामान लेकर उतर गया । दीपक ने राहत की सांस ली । तभी बाजू की खाली सीट पर एक मजदूर सा लगता यात्री आकर बैठ गया ।
बस फिर से चल दी । पर बदबू तो वहीं की वहीं , जाने का नाम ही नही ले रही थी । दीपक ने मजदूर को ध्यान से देखा । मजदूर के कपड़े बेहद गन्दे थे । दीपक को फिर से क्रोध आने लगा । अच्छा तो ये भी नही नहाता है ! आखिर इस वर्ग को इस तरह गन्दा रहना क्यों पसन्द है ? देखो तो मेरी नाक सड़ा कर खुद मजे से गाना गा रहा है । पर ये भी तो सच है कि खुद की बदबू खुद को नही आती । वो तो दूसरों के लिये उपहार स्वरू़प होती है । दीपक को किसी तरह भी समझ मे नही आ रहा था कि वो इस कठिन ‘ परिस्थिति’ का सामना कैसे करे ।
इस विकट परिस्थिति ने  आगेे क्या मोड़ लिया ये जानेगे अगली बार ।
हल्की

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